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हाईकोर्ट ने सीपीएस नियमो मे एक्सपर्ट से मांगी राय

By admin Apr25,2024

ब्यूरो रिपोर्ट शिमला

मुख्य संसदीय सचिव मामले मे एक बडा मोड आ गया है। सीपीएस पद इजाद किए जाने का नया कानून और इसकी अनुपालना सुनिश्चित किए जाने को लेकर हिमाचल सरकार की ओर से की गई अपील पर हाईकोर्ट ने मोहर लगा दी है। अब सुप्रीम कोर्ट के एक्सपर्ट वकील इस मामले मे नया कानून इजाद करने को लेकर हाईकोर्ट को सलाह देगे। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज फिर सुनवाई हुई। अब इस मामले में प्रदेश सरकार की ओर से अपील पर सुप्रीम कोर्ट के वकील अपनी राय पेश करेगे। जिसके लिए कोर्ट ने मामले को 8 मई को सूचीबद्ध करने के आदेश जारी किए।

मामले पर सुनवाई के दौरान सीपीएस की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि वे केवल मंत्रियों को उनके कार्यों में सहायता प्रदान करते हैं। उनका मंत्रिमंडल के कार्यों से कोई लेना देना नहीं है। उनकी ओर से कहा गया कि उनकी नियुक्ति कानून के अनुसार की गई है और उनकी नियुक्ति से किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होता। कोर्ट में सरकार की ओर से बताया गया है कि सभी सीपीएस कानून के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि कोई भी सीपीएस मंत्रियों वाली सुविधाएं भी नहीं ले रहे है। भाजपा नेता सतपाल सत्ती सहित 12 भाजपा विधायकों ने सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती दी है। याचिका में अर्की विधानसभा क्षेत्र से सीपीएस संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल की नियुक्ति को चुनौती दी गई है।

एडवोकेट जनरल अनूप रत्न ने बताया कि क्योंकि यह बहुत बड़ा कांस्टीट्यूशनल मैटर है। जिसमें प्रदेश विधानसभा प्रदेश सरकार किस प्रकार का कानून बना सकती है या इस प्रकार का कानून नहीं बन सकती है। उन्होने बताया कि इस कानून का जो प्रभाव है वह पूरे देश पर होने वाला है। इसलिए इस मामले में जो देश में बेस्ट कांस्टीट्यूशनल एक्सपर्ट एडवोकेट्स है उनकी भी सेवाएं लिए जाने के लिए प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। उन्होने कहा कि न्यायालय ने आज हमारी यह याचिका स्वीकार कर ली है। उन्होने बताया कि सीपीएस मामले मे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिह और प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल अपना रुख सीपीएस प्रणाली के पक्ष मे साफ कर चुके थे। और ध्वनीमत से यह बिल विधानसभा मे पारित किया गया था। उन्होने कहा कि कुछ तकनीकी पेचिदगियो से यह बिल कानून न बन पाया था। लेकिन अब यह कानून बनेगा और पूरे देश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। उन्होने यह भी कहा कि आज जिन्होने सीपीएस पद की गरिमा को चुनौती दी है। ये वही लोग है जिन्होने अपनी सरकार मे इन पदो का सबसे अधिक फायदा उठाया है।

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