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निर्दलीय विधायको पर दल बदल कानून की लटकी तलवार

By admin Apr25,2024

ब्यूरो रिपोर्ट शिमला

तीन निर्दलीय विधायकों पर दल बदल कानून की तलवार लटक गई है । कांग्रेस के विधायकों ने शिकायत की है कि क्योंकि विधानसभा में निर्दलीय विधायकों का इस्तीफा मंजूर किए जाने से पहले ही वह भाजपा में शामिल हो गए थे। इसलिए दल बदल कानून के तहत उन्हें विधानसभा से निष्कासित किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने एक षड्यंत्र के तहत बहुमत की सरकार को गिराने की कोशिश की है। जिसमें वह सफल नहीं हुए कांग्रेस का यह भी आरोप है कि सीबीआई और केंद्रीय एजेंसी का डर दिखाकर कांग्रेस के बागी विधायकों को दागी बना दिया । जबकि तीन निर्दलीय विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सोपा गया इस्तीफा भी भाजपा की दबाव में दिया गया। इस प्रकरण के उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं ।

राजधानी शिमला में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए हिमाचल सरकार के मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि निर्दलीय विधायकों द्वारा विधानसभा में विधानसभा में दिया गया इस्तीफा अभी विचाराधीन है ।इसके अलावा उन्होंने एक याचिका माननीय न्यायालय में भी डाली है ।उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों ने अब विधानसभा अध्यक्ष को एक अपील की है जिसमें निर्दलीय विधायकों पर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। दल बदल कानून के तहत इस्तीफा मंजूर किए जाने से पहले निर्दलीय विधायक किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकते हैं। साफ तौर पर यह है उनकी अयोग्यता को दर्शाता है ।

शिमला के विधायक हरीश जनार्दन ने बताया कि तीनों विधायकों ने बीते 22 मार्च को अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौप था। इस दौरान उनके साथ विपक्षी दल के नेता समेत भाजपा के विधायक राकेश जमवाल और विक्रम ठाकुर समेत अन्य लोग भी मौजूद थे, जिसके कांग्रेस सरकार के पास पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी प्रकार का कोई खतरा था तो वह हिमाचल सरकार से सुरक्षा की मांग कर सकते थे । लेकिन विधानसभा के स्पीकर के पास भाजपा द्वारा एस्कॉर्ट करके उन्हें ले जाया जाना यही साबित करता है कि वह दबाव में थे । जनार्था ने कहा कि इससे पूर्व विधायक सीआरपीएफ के घेराव की जद में थे। जबकि एक माह तक भाजपा द्वारा प्रायोजित हेलीकॉप्टर में और विभिन्न होटलों में घूमते रहे। अहम बात यह है कि इस दौरान उनका खुद के निजी कारोबार से भी संबंध विच्छेद हो गया था । यह तमाम तथ्य विधानसभा अध्यक्ष के संज्ञान में लाए गए हैं। इससे साफ है कि इन निर्दलीय विधायकों पर दबाव डाला गया और उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा है।

मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय घोषणा पत्र पर सवाल उठाए गए हैं लेकिन आज स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा तक भी है जानता है कि किसी भी निजी संपत्ति को कोई भी सरकार नियमों के अंतर्गत अपने अधीन नहीं कर सकती।जिसमें बहुतेरे कानून शामिल है । उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के घोषणा पत्र पर सवाल उठाना हास्यास्पद है ।जगत सिंह नेगी ने कहा कि कांग्रेस की घोषणा पत्र में जो जमीन आवंटन की बात की गई है वह सरकारी जमीन होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र को न्याय पत्र की संज्ञा दी गई है, जिसमें अल्पसंख्यक, महिलाओ, बेरोजगारो के लिए नीतिगत न्याय व अग्नि वीर जैसी विभिन्न योजनाओं पर आम आदमी को राहत दिए जाने की बातें शामिल हैं।

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