पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की धर्मशांति में मुकेश-सुधीर की टोपियों के रंगों की खूब हो रही चर्चा

himachal

 

विजय आजाद…

हिमाचल की राजनीति में टोपियों और उनके रंग की विशेष अहमियत है। ये टोपियां पार्टी, क्षेत्र, व्यक्ति की पहचान दिखाती आई हैं। बहुत बार ये टोपियां राजनीति और विचारधारा का केंद्र बनती रही हैं। अपने जीवनकाल में स्व. वीरभद्र सिंह ने हमेशा हरे रंग की बुशहरी टोपी ही पहनी। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मैरून (लाल) और पूर्व मुख्यमंत्री शांत कुमार ने कुल्लवी टोपी को एक अलग पहचान दी। इन सब से हटकर पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने अलग पहचान बनाने के लिए तिरंगनी टोपी लांच कर टोपी और क्षेत्रवाद के विवाद को खूब हवा दी थी। आज ये टोपियां फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार चर्चा में आए हैं स्व. वीरभद्र सिंह के दो राजनीतिक चेले। दोनों की चेलों को उन्होंने अंगुली पकड़कर राजनीति की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर चलना सिखाया।

अब रामपुर में स्व. वीरभद्र सिंह के घर धर्मशांति के मौके पर दो नेताओं की टोपियों के रंग दिखने को मिले। यहां पंहुंचे नेताओं में इसकी खूब चर्चा भी थी। मुकेश जहां हरे रंग की पट्टी वाली टोपी में थे, तो वहीं सुधीर शर्मा लाल रंग वाली टोपी में थे। सुधीर शर्मा की टोपी को कहीं न कहीं भाजपा से जोड़कर देखा जाता है। वीरभद्र सिंह को हरे रंग की रामपुरी टोपी पसंद थी। मुकेश भी इसे पहनकर बैठे थे ,जिससे वो आगे के संकेत भी दे रहे थे। दोनों की अब तक की आपसी समझ बहुत अच्छी रही है, मगर टोपी के अलग रंग कहीं दोनों की दिशाएं तो नहीं बदल रहे? या फिर कांग्रेस अब टोपी की किचकिच खत्म तो नहीं कर रही है… यह सब चर्चा के केंद्र में है। हालांकि रामपुर में इस मौके पर कौल सिंह, सुक्खू व बाली को छोड़कर कांग्रेस के लगभग सभी नेता मौजूद थे। लाल रंग की टोपी पहने सुधीर शर्मा ने हरिद्वार जाकर अपने बाल भी कटवाए हैं। कांग्रेस नेताओं में इन टोपियों के रंग की खूब चर्चा है। ये टोपियां अब किस दिशा में ले जाएंगी, यह कहा नहीं जा सकता, मगर इन रंगों के पीछे राजनीतिक हसरतें जरूर हैं।

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