टांकरी लिपी के पुनरजीवन के लिए छोटी काशी में हुई हैरिटेज टॉक

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लोकेशन – मंडी/अशवनी

टांकरी लिपी के पुनरजीवन के लिए छोटी काशी में हुई हैरिटेज टॉक
भारतीय सांस्कृतिक निधि मंडी चैप्टर द्वारा किया गया था हैरिटेज टॉक का आयोजन
टांकरी लिपी पर शोध करने वाले जगदीश कपूर ने इस पर विस्तार से रखी बात
कहा- पहाड़ी इतिहास में बहुत सी बातें टांकरी लिपी में लिखी हुई
अंग्रेजी हकुमत आने के बाद विलुप्त होती गई पहाड़ की टांकरी लिपी
लेकिन आज इसे फिर से पुनरजीवित करने की जरूरत

हिमाचली बोलियों को पहचान दिलाने वाली टांकरी लिपी को अब फिर से पुनरजीवन देने की दिशा में प्रयास होना शुरू हो गए हैं। भारतीय सांस्कृतिक निधि मंडी चैप्टर ने इस दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं। इनकी तरफ से मंडी में टांकरी लिपी पर हैरिटेज टॉक का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के वरिष्ठ नागरिकों, इतिहासकारों और साहित्यकारों ने भाग लिया। टांकरी लिपी पर शोध करने वाले सेवानिवृत बैंक अधिकारी जगदीश कपूर को इस हैरिटेज टॉक में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बताया कि पहले पहाड़ी बोलियों की टांकरी लिपी हुआ करती थी, लेकिन अंग्रेजी हकुमत आने के बाद धीरे-धीरे ये लिपी विलुप्त होती गई। आज इतिहास के बहुत से पन्नों पर टांकरी लिपी में लिखे हुए लेख मिलते हैं। आज इस लिपी को फिर से जीवित करने की जरूरत है, ताकि भावी पीढ़ी को इसके महत्व से अवगत करवाया जा सके।

भारतीय सांस्कृतिक निधि मंडी चैप्टर के संयोजक नरेश मल्होत्रा और सह संयोजक अनिल शर्मा ने बताया कि उनकी संस्था ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में काम कर रही है। संरक्षण की दृष्टि से टांकरी लिपी को भी इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस दिशा में पूरा मास्टर प्लान बनाकर इसके संरक्षण की कड़ी को आगे बढ़ाया जाएगा।

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