सड़क जैसी सुविधा से नहीं जुड़ पाया टोलमा गांव

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आज का समाचार के लिए उत्तराखंड से नवीन सिंह की रिपोर्ट

सीमांत घाटी का दूरस्थ गांव माना जाता है टोलमा गांव को जो गांव सुराहीथोटा से 7 किलोमीटर के आसपास मौजूद है, जिस गांव में वाहनों से नहीं बल्कि पैदल खड़ी चढ़ाई पार करनी होती है, जी हां आपने सही सुना सीमांत घाटी का सबसे दुरस्त गांव टोलमा गांव जो गांव कई वर्षों से सड़क जैसी सुविधा के लिए तरस रहा है, जिस गांव में कई वर्षों से सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है, कहने को तो इस गांव में सड़क कटिंग का काम कई वर्षों पहले शुरू किया गया, लेकिन वह कार्य भी सिर्फ अधूरा, यहां के स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हमारे गांव में वर्षों पहले सड़क कटिंग का काम शुरू किया गया लेकिन जिसके कुछ महीने बाद सड़क निर्माण कार्य बंद हो गया, कई वर्ष बीत गए लेकिन आज तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया, ग्रामीणों का कहना है कि जो अधूरी सड़क जहां तक बनाई गई वह सड़क कई सालों पहले भूस्खलन के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है, और जिसके कारण उनका पैदल जाने वाला रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया, तब से हम लोग जान हथेली पर डालकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं, आपको बता दें कि यह गांव वर्षों से सड़क जैसी सुविधा के लिए तरस रहा है, लेकिन इस गांव की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है, यहां के ग्रामीण आज भी मिलो मिलो पैदल चलने के लिए मजबूर है, यहां की स्थानीय ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यदि इस गांव में कोई अचानक बीमार हो जाता है या किसी महिला की डिलीवरी होती है तो वे लोग बीमारों को दण्डी कंडी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं, ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार शासन प्रशासन को अपने गांव की समस्या के बारे में कई बार अवगत करा दिया है लेकिन आज तक हमारी समस्या किसी ने भी नहीं सुनी, ग्रामीण कह रहे हैं उन्होंने यहां तक की कई बार टीवी चैनल अखबारों में अपनी समस्या पहुंचा दी है लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हो पाया है, बड़ी बात तो यह है कि सड़क तो छोड़िए इस गांव में पैदल जाने का रास्ता भी ठीक ढंग से नहीं बना हुआ है जैसे तैसे करके यहां के स्थानीय ग्रामीण जान हथेली पर डालकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं, रास्ता इतना खतरनाक की ऊपर से चट्टान टूटने का डर अलग से बना हुआ रहता है,

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